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IPC 392 और BNS 309 – डकैती (Robbery) का कानून

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IPC 392 vs BNS 309 | Robbery Law + BNSS 309 Judgment | Pandey Legal Solution

IPC 392 vs BNS 309 – डकैती का कानून
Robbery Law in India

Overview:
डकैती (Robbery) भारत के सबसे गंभीर आपराधिक अपराधों में से एक है। पहले यह अपराध IPC Section 392 के अंतर्गत दर्ज होता था, जिसे अब BNS Section 392 द्वारा Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 में प्रतिस्थापित किया गया है।

🔹 IPC Section 392 – Robbery (पुराना कानून)

IPC धारा 392 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति चोरी या उगाही करते समय किसी व्यक्ति को मृत्यु, चोट या तत्काल हिंसा का भय दिखाता है, तो वह अपराध डकैती (Robbery) कहलाता है।

Under IPC Section 392, robbery occurs when theft or extortion is committed by causing or threatening instant death, hurt, or violence.

🔹 BNS Section 392 – Robbery (नया कानून)

BNS धारा 392 में डकैती की वही परिभाषा रखी गई है, लेकिन इसे सरल और आधुनिक भाषा में प्रस्तुत किया गया है। हिंसा, चोट या तत्काल भय के साथ की गई चोरी या उगाही BNS Section 392 के अंतर्गत अपराध है।

🔹 आवश्यक तत्व (Essential Ingredients of Robbery)

  • चोरी या उगाही का होना (Theft or extortion)
  • हिंसा या तत्काल भय (Violence or fear)
  • आपराधिक इरादा (Criminal intention)

🔹 सजा (Punishment)

  • 10 वर्ष तक का कठोर कारावास
  • जुर्माना
  • रात्रि में राजमार्ग पर डकैती → 14 वर्ष तक

🔹 IPC 392 vs BNS 309 – Comparison

बिंदु IPC 392 BNS 309
कानून Indian Penal Code, 1860 Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
अपराध डकैती डकैती
सजा 10–14 वर्ष 10–14 वर्ष

⚖️ BNSS धारा 392 – निर्णय की घोषणा

BNSS Section 392:
यह धारा आपराधिक मामलों में फैसला (Judgment) कब, कैसे और किस प्रकार खुली अदालत में सुनाया जाएगा, इसकी प्रक्रिया निर्धारित करती है।

🔹 निर्णय सुनाने की समय-सीमा

  • मुकदमे की समाप्ति के तुरंत बाद, या
  • अधिकतम 45 दिनों के भीतर

🔹 निर्णय सुनाने की विधि

  • पूरा निर्णय सुनाकर
  • पूरा निर्णय पढ़कर
  • केवल क्रियात्मक भाग पढ़कर और समझाकर

🔹 अभियुक्त की उपस्थिति

  • हिरासत में → अदालत या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
  • हिरासत में नहीं → उपस्थिति आवश्यक

🔹 निर्णय की वैधता

केवल अभियुक्त या अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण निर्णय अमान्य नहीं होगा।

❓ BNSS धारा 392 – FAQs

Q1. क्या आरोपी की अनुपस्थिति में फैसला सुनाया जा सकता है?
हाँ, केवल अनुपस्थिति से निर्णय अमान्य नहीं होता।

Q2. फैसले की अधिकतम समय-सीमा क्या है?
मुकदमे की समाप्ति के 45 दिनों के भीतर।

Q3. क्या पूरा फैसला पढ़ना जरूरी है?
नहीं, केवल निर्णय का क्रियात्मक भाग भी पढ़ा जा सकता है।

निष्कर्ष:
यह पृष्ठ IPC 392, BNS 309 और BNSS धारा 392 को एक साथ समझाकर डकैती के अपराध और निर्णय प्रक्रिया दोनों पर स्पष्ट कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करता है।

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