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BNS Section 318 (Cheating / धोखाधड़ी)
भारतीय न्याय संहिता (BNS) – धारा 318
धोखाधड़ी (Cheating)
परिचय
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 धोखाधड़ी (Cheating) से संबंधित है। यह धारा पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 415, 417 और 420 का आधुनिक रूप है। इसका उद्देश्य झूठे प्रतिरूप, छल और बेईमानी से संपत्ति या लाभ प्राप्त करने वाले कृत्यों को दंडित करना है।
धारा 318 – धोखाधड़ी की परिभाषा
यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को धोखा देकर, झूठा प्रतिरूप प्रस्तुत करके या तथ्यों को छिपाकर, इस आशय से प्रेरित करता है कि वह व्यक्ति संपत्ति सौंपे या कोई ऐसा कार्य करे या न करे जिससे उसे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या प्रतिष्ठात्मक क्षति हो, तो ऐसा कृत्य धोखाधड़ी कहलाता है।
धारा 318(1) – साधारण धोखाधड़ी की सज़ा
जो कोई व्यक्ति धोखाधड़ी करता है, उसे:
- अधिकतम तीन वर्ष तक का कारावास, या
- जुर्माना, या
- दोनों (कारावास और जुर्माना)
धारा 318(2) – संपत्ति या मूल्यवान सुरक्षा से संबंधित धोखाधड़ी
यदि धोखाधड़ी के कारण:
- किसी संपत्ति की डिलीवरी होती है, या
- किसी मूल्यवान सुरक्षा का निर्माण, परिवर्तन या विनाश होता है,
तो अभियुक्त को:
- अधिकतम सात वर्ष तक का कारावास, और
- जुर्माना
धारा 318(3) – विश्वास के दुरुपयोग से धोखाधड़ी
यदि धोखाधड़ी किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है जिस पर विशेष विश्वास किया गया हो, जैसे एजेंट, कर्मचारी, साझेदार या सलाहकार, और वह अपने पद या संबंध का दुरुपयोग करता है, तो इसे गंभीर धोखाधड़ी माना जाएगा।
ऐसे मामलों में अभियुक्त को धारा 318(2) के अंतर्गत कठोर दंड दिया जा सकता है।
धारा 318 लागू होने के आवश्यक तत्व
- धोखा या छल (Deception)
- प्रारंभ से ही बेईमान इरादा (Mens Rea)
- पीड़ित को संपत्ति देने या नुकसान उठाने के लिए प्रेरित करना
- वास्तविक क्षति या संभावित क्षति
IPC और BNS में तुलना
| IPC | BNS |
|---|---|
| धारा 415 – धोखाधड़ी | धारा 318 – परिभाषा |
| धारा 417 – साधारण धोखाधड़ी | धारा 318(1) |
| धारा 420 – संपत्ति की धोखाधड़ी | धारा 318(2) |
निष्कर्ष
BNS की धारा 318 धोखाधड़ी से संबंधित एक व्यापक और सशक्त प्रावधान है, जिसका उद्देश्य आर्थिक अपराधों और विश्वासघात को रोकना तथा पीड़ितों को न्याय प्रदान करना है।

