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BNS Section 299 –गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide)
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!BNS Section 299 – गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide)
Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 299 उस अपराध से संबंधित है जिसे गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) कहा जाता है, जहाँ मृत्यु तो होती है, लेकिन हत्या जैसा स्पष्ट इरादा नहीं होता।
🔹 धारा 299 BNS की परिभाषा
यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु इस इरादे से करता है कि उससे मृत्यु हो सकती है, या ऐसी चोट पहुँचाता है जिससे मृत्यु होने की संभावना हो, तो वह अपराध BNS Section 299 के अंतर्गत गैर-इरादतन हत्या कहलाता है।
🔹 आवश्यक तत्व (Essential Ingredients)
- किसी व्यक्ति की मृत्यु होना
- मृत्यु आरोपी के कृत्य से हुई हो
- मृत्यु का इरादा या ज्ञान मौजूद हो
- कृत्य और मृत्यु के बीच संबंध हो
🔹 सजा (Punishment under BNS 299)
BNS Section 299 के अंतर्गत सजा अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है, जो आगे BNS Section 100–102 के अनुसार निर्धारित होती है:
- 10 वर्ष तक का कारावास, या
- आजीवन कारावास, या
- जुर्माना
🔹 उदाहरण (Example)
यदि किसी व्यक्ति ने गुस्से में आकर किसी को धक्का दिया और उसके गिरने से मृत्यु हो गई, लेकिन मारने का स्पष्ट इरादा नहीं था, तो यह अपराध BNS Section 299 के अंतर्गत आएगा, न कि हत्या।
🔹 BNS Section 299 और 300 में अंतर
जहाँ BNS Section 299 में मृत्यु का इरादा कम गंभीर होता है, वहीं BNS Section 300 में स्पष्ट और गंभीर इरादा मौजूद होता है।
👉 BNS Section 300 – Murder की पूरी जानकारी देखें
🔹 IPC से तुलना (IPC vs BNS)
पहले गैर-इरादतन हत्या का अपराध IPC Section 299 के अंतर्गत आता था, जिसे अब BNS Section 299 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है।
🔹 क्या यह जमानती अपराध है?
अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों के आधार पर यह अपराध जमानती या गैर-जमानती हो सकता है।
🔹 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q. क्या हर मृत्यु का मामला हत्या होता है?
नहीं, कई मामलों में अपराध BNS Section 299 के अंतर्गत आता है।
Q. क्या BNS 299 में सजा कम हो सकती है?
हाँ, यदि हत्या का स्पष्ट इरादा सिद्ध न हो।
